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Thursday, September 4, 2008

Gareeb Ki Awaz



दोस्तों नमस्कार,
सर्वप्रथम मै गूगल को धन्यवाद् देना चाहता हूँ की उसने मुझे बिना किसी परेशानी के हिंदी लिखने की आज़ादी दी जिससे मै  अपने मन की भावनाओ को प्रकट कर सकू . दुनिया में घटित हो रही घटनाओ पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकू.

दोस्तों लगभग चार पांच साल पहले मैंने गरीब की आवाज़ नाम से ब्लॉग लिखने की सुरुआत की थी लेकिन हिंदी टाइप न जानने की वजह से वह ब्लॉग बिलकुल बेकार पड़ा था, अब आज गूगल की वजह से मेरे मन की वह चाहत पूरी हो रही है इसके लिए पुन: गूगल को धन्यवाद्.

दोस्तों आज इक्कीसवी सदी में लोग चाँद और मंगल पर बसने का सपना देख रहे है लेकिन अपने देश में उन गरीबो के बारे में क्या कोई सोचता है जो २0 से ३० रुपये प्रतिदिन में अपने परिवार का खर्च चला रहे है ,

सरकारे केवल अपना बजट संतुलन देखती है और तरह तरह के टैक्स लगाकर अपना खजाना भरती है.

क्या आपने कभी सोचा है की इन सारे  टैक्स की मार  अंत में गरीब को ही झेलनी पड़ती  है, व्यापारियों अथवा अमीर तबके के ऊपर जो भी टैक्स लगता है वह सारा टैक्स वे जो भी व्यवसाय अथवा जो  भी काम करते है उसमे जोड़कर  वसूल लेते है.

इसतरह से गरीब कभी भी गरीबी से ऊपर नहीं उठ पाता  और अमीरों का खजाना भरता ही रहता है.