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Tuesday, January 21, 2014

भारतीय लोकतंत्र का एक कटु सत्य

हे गरीबो
तुम भारत का प्रधानमंत्री बनाने का सपना मत देखो
तुम पैदा ही हुए हो
गरीबी में मरने के लिए
तुम उसी गन्दी बस्ती में रहो

हे गरीबो
तुम चाय बेचो
तुम सब्जी बेचो
तुम मोची का काम करो
तुम हमारे घरो में झाड़ू पोछा  करो
हमारे घरो में आया का काम करो
लेकिन कभी प्रधानमंत्री बनाने की जुर्रत मत करना

अरे अगर कुछ बनाए की चाहत ही है तो
किसी ऑफिस में बाबु बन जाना
किसी दुकान में काम कर लेना
या कोई ठेला खोमचा लगा लेना
लेकिन
कभी भारत का प्रधानमंत्री बनाने का सपना मत देखना

तुम चाहे जिस जाति  से हो
हमें इससे कोई मतलब नहीं
तुम हो तो गरीब या मिडिल क्लास
जिसे हम कहते है कैटल (जानवर ) क्लास
तुम्हरी भलाई इसी में है
कि
तुम हमारे युवराज की तरफ नजर भी
उठाकर मत देखना
क्योंकि
वो पैदा ही हुआ है
देश का प्रधान मंत्री बनाने के लिए

अरे कौन कहता है की हमारे राज में
मरते है लोग भूखे
हमारे प्रवक्ता ने बतया नहीं
या तुम बहरे हो
जो सुन नहीं सकते
जब दिल्ली जैसे जगह पर
१० रुपये में भर पेट सकते हो खा
मुंबई में भी यही है हाल
तो पुरे देश में तो
२ से ३ रुपये में
भर सकते हो पेट

अरे तुम तो जिंदगी
जीने के लिए ही जीते हो
हमारे तो
दादा परदादा भी
बड़े राजसी ठाट से जिए

क्या तुम्हरे खानदान में
कभी किसी ने
पेरिस में धुले
पहने है कपडे
हम तब भी पनते थे
हम आज भी पहनते है
और हा हम आगे भी
पहनते रहगे

क्योंकि हमें पता है
हमें तुम्हे जातियों में बाटना आता है
हमें तुम्हे धर्म में बाटना आता है


अगर तुम नहीं माने 
बात हमारी
तो देख लेना देश बर्बाद हो जायेगा
आग लगा दूंगा मै 
अमन और शांति में 


तो ए जानवर छाप मनुष्यों 
हट जाओ 
रस्ते से
सह्जादा 
आ रहा है